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कोल इंडिया लि. (सीआईएल) और सहायक कंपनियों

कोयला मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कोयला उद्योग की शीर्ष निकाय कोल इंडिया लि. है जिसका मुख्यालय कोलकाता में है। यह नीति मार्गनिर्देशों को निर्धारित करने और अपनी सहायक कंपनियों के साथ समन्व्य कार्य के लिए उत्तरदायी है। सीआईएल को उसकी सभी सहायक कंपनियों की ओर से निवेश, आयोजना, जनशक्ति प्रबंधन, हेवी मशीनरी की खरीद, वित्तीय बजट बनाने आदि का उत्तरदायित्व सौंपा गया है, कोल इंडिया लि. (सीआईएल) के नियंत्रणाधीन सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम की इसकी निम्नलिखित 8 सहायक कंपनियां है :-

भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), धनबाद, झारखंड
सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), रांची, झारखंड
ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), संकतोड़िया, प.बंगाल
वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल), नागपुर, महाराष्ट्र
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), बिलासपुर, छत्तीसगढ़
नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल), सिंगरौली, मध्य प्रदेश
महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल), सम्बलपुर, उड़ीसा
सेंट्रल माइन प्लानिंग एण्ड डिजाइन इन्स्टीच्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल), रांची, झारखंड।

नेयवेली लिग्नाइट कारपोरेशन लिमिटेड

कोयला विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में नेयवेली लिग्नाइट कारपोरेशन लिमिटेड है जिसका पंजीकृत कार्यालय चेन्नई में और कारपोरेट कार्यालय नेयवेली, तमिलनाडु में है। यह कंपनी लिग्नाइट भंडारों के दोहन और उत्खनन, तापीय विद्युत उत्पादन तथा कच्चे लिग्नाइट की बिक्री का भी काम करती है।

सिंगरेनी कोलियरीज कम्पनी लि. (एससीसीएल)

एससीसीएल आंध्र प्रदेश सरकार और भारत सरकार का एक संयुक्त उपक्रम है। इक्विटी पूंजी को आंध्र प्रदेश सरकार और केंद्रीय सरकार के बीच क्रमश: 51:49 में अनुपात में बांटा गया है। कम्पनी का मुख्यालय कोठागुडम, आंध्र प्रदेश में है। एससीसीएल देश के कोयला उत्पादन का लगभग 10ऽ का उत्पादन करती है और इसका 76ऽ उत्पादन महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्रों को प्रेषित किया जाता है। एससीसीएल का शेष कोयला उत्पादन की आपूर्ति सीमेन्ट कंपनियों और अन्य उद्योगों को की जाती है। नई कोयला परियोजनाओं में निवेश के लिए एससीसीएल में दीर्घावधि वित्तीय स्थिरता उपलब्ध कराने के लिए और इसके उत्पादन को प्रभावकारी रूप से बढ़ाने के लिए, जून, 1999 में कम्पनी का वित्तीय पुनर्गठन किया गया है।

कोयला खान भविष्य निधि संगठन

कोयला खान भविष्य निधि संगठन कोयला खान भविष्य निधि तथा विविध प्रावधान अधिनियम, 1948 के अंतर्गत गठित एक स्वायत्ता शासी निकाय है। यह संगठन इन सभी निम्नलिखित योजनाओं को प्रशासित करता है जो उपर्युक्त अधिनियम के अंतर्गत बनाई गई थी :- कोयला खान भविष्य निधि योजना, 1948, कोयला खान परिवार पेंशन योजना, 1971 जिसका स्थान एक नई योजना नामत: कोयला खान पेंशन योजना, 1998 ने ले लिया है, जो 31.3.98 से लागू हुई थी और कोयला खान जमा सहबध्द बीमा योजना, 1976।

संगठन की निधि को एक त्रिपक्षीय निकाय प्रशासित करता है जिसे न्यासी बोर्ड कहा जाता है जिसमें (त्) केन्द्रीय सरकार#राज्य सरकारों, (त्त्) नियोक्ताओं तथा (त्त्त्) कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। न्यासी बोर्ड कोयला विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है। यह बोर्ड संगठन की कार्य-प्रणाली की प्रत्येक बैठक में समीक्षा करता है।

सीएमपीएफ संगठन के इतिहास की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है कोयला खान पेंशन योजना, 1998 को शुरू किया जाना जो 31 मार्च, 1998 से प्रभाव में आई। इससे देश के लगभग 8 लाख कोयला श्रमिकों को लाभ मिलेगा। कोयला खान पेंशन योजना, 1998 को शुरू किए जाने से भूतपूर्व परिवार पेंशन योजना, 1971 बन्द हो गयी है तथापि, वे पेंशनभोगी, जो भूतपूर्व परिवार पेंशन योजना, 1971 के अंतर्गत लाभ प्राप्त कर रहे थे, पुरानी कोयला खान परिवार पेंशन योजना, 1971 के अंतर्गत पेंशन प्राप्त करते रहेंगे।

कोयला नियंत्रक संगठन

कोयला नियंत्रक संगठन, कोयला एवं खान मंत्रालय, कोयला विभाग का एक अधीनस्थ कार्यालय है और इसका मुख्यालय कोलकाता में है तथा धनबाद, रांची, बिलासपुर और नागपुर में इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं।

  कोलियरी नियंत्रण आदेश, 2000
  कोयला खान (संरक्षण और विकास) अधिनियम, 1974 ओर कोयला खान (संरक्षण ओर विकास) नियम, 1975
  सांख्यिकी एकत्रीकरण अधिनियम, 1953 (1953 का 32) और सांख्यिकी एकत्रीकरण (केंद्रीय) नियम, 1959
  कोयलाधारी क्षेत्र (अधिग्रहण और विकास) अधिनियम, 1957 (1957 का 20)

उपर्युक्त के अलावा, कोयला नियंत्रक को खान तथा खनिज विनिमयन और विकास अधिनियम, 1957 के अंतर्गत कुछ कार्य सौंपे गए हैं।

उपर्युक्त सांविधिक कार्यों के अलावा, कोयला नियंत्रक को निम्नलिखित उत्तरदायित्तों का भी निर्वाह करना होता है -

  भूतपूर्व कोयला बोर्ड के बकाया काम की देख रेख करना।
  विभिन्न संविधियों से उत्पन्न उन कानूनी मामलों#न्यायालयों में लम्बित मामलों पर कार्रवाई करना, जिनके लिए कोयला नियंत्रक को उत्तरदायी बनाया गया है।

भुगतान आयुक्त

भुगतान आयुक्त का कार्यालय कोककर कोयला खान (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 तथा कोयला खान (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1973 के अनुसरण में स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य वर्ष 1972-73 में राष्ट्रीयकृत कोयला खानों के समूह अथवा कोयला खानों के मालिकों को देय राशियों का वितरण करना था। आरम्भ में भुगतान आयुक्त के दो कार्यालय थे, जिनमें एक कार्यालय धनबाद में स्थित था, जो कि राष्ट्रीयकृत कोककर कोयला खानों और कोक ओवन संयंत्रों के लिए मुआवजा आदि के निर्धारण के लिए था और दूसरा राष्ट्रीयकृत अकोककर कोयला खानों से संबध्द था, जिसका मुख्यालय कोलकाता में था। धनबाद कार्यालय का अधिकांश काम समाप्त हो जाने के बाद इसे बंद कर दिया गया और इसके बकाया कार्य को भुगतान आयुक्त, कोलकाता के कार्यालय को अंतरित कर दिया गया था। वर्तमान मे कोयला नियंत्रक भुगतान आयुक्त के रूप में कार्य कर रहा है।